EXCLUSIVE: "बॉलीवुड, टॉलीवुड सब वुड को आग लगा दो", पैन इंडिया रिलीज के सवाल पर बोले KGF के 'Rocky Bhai

EXCLUSIVE: "बॉलीवुड, टॉलीवुड सब वुड को आग लगा दो", पैन इंडिया रिलीज के सवाल पर बोले KGF के 'Rocky Bhai
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एस एस राजामौली की फिल्म 'बाहुबली' की सफलता के बाद से ही मनोरंजन की दुनिया में हिंदी और साउथ सिनेमा के बीच खिंची लकीर धीरे-धीरे मिटने लगी है। पहले बाहुबली सीरीज, फिर केजीएफ चैप्टर 1, उसके बाद पुष्पा- पार्ट वन और अब केजीएफ चैप्टर 2 पैन इंडिया स्तर पर रिलीज हो रही हैं। सिनेमा में आ रहे इस बदलाव की वजह से दर्शकों को अपना मनोरंजन करने के लिए कई विकल्प मिल रहे हैं। लेकिन इस परिवर्तन ने साउथ इंडस्ट्री के अभिनेताओं पर क्या असर डाला है, ये जानने के लिए अमर उजाला के पत्रकार वर्तिका तोलानी और आसिफ खान ने केजीएफ चैप्टर 2 के अभिनेता यश से खास बातचीत की है। पढ़िए..  

सिनेमा में भाषाओं की बंदिशें खत्म हो रही हैं और अब देश के किसी भी कोने के लोग बस एंटरटेनिंग सिनेमा देखना चाहते हैं। केजीएफ ने हिंदी भाषी राज्यों में कमाई का जो पैमाना सेट किया, उसे देखते हुए केजीएफ 2 में आपके सामने चुनौती कितनी बढ़ी?

ऑडियंस ने बहुत पहले ही भाषा की बेड़ियों को तोड़ दिया था। उन्होंने इस परिवर्तन से पहले ही दूसरी भाषाओं के सिनेमा को अपनाना शुरू कर दिया था। तभी 2018 में आई केजीएफ चैप्टर 1 को इतना प्यार मिला। हालांकि इसकी वजह से हम पर कोई प्रेशर नहीं है।

बल्कि जिस तरह से लोगों ने हमारी फिल्म को अपनाया है, उसकी वजह से हमें चैप्टर 2 बनाने के लिए हिम्मत मिली। लोगों ने हमें शक्ति दी और कहा जाओ बनाओ, हम आपकी फिल्म देखने के लिए बैठे हैं। इसलिए प्रेशन नहीं मजा है। हां, जो प्यार हमारे टीजर और ट्रेलर को मिल रहा है, उससे हमें ये जरूर समझमें आ रहा है कि लोगों को हमसे बहुत उम्मीदें हैं। और हमने उनकी उम्मीदों पर खरे उतरने के लिए मेहनत भी की है।

बाहुबली सीरीज की फिल्में, फिर केजीएफ वन, फिर पुष्पा पार्ट वन और अब केजीएफ 2, क्या आपको लगता है कि हिंदी सिनेमा मनोरंजन की दुनिया में एकछत्र राज्य टूट रहा है?

हिंदी राज्यों में दूसरी भाषा की फिल्मों को देखने का एक ट्रेंड चल पड़ा है। ट्रेंड किसी चीज को खत्म नहीं करता है। हां, ये एक सिग्नल जरूर है। ये एक इशारा है कि पब्लिक को अब ऐसी फिल्में पसंद आ रही हैं। मुझे लगता है जो पैसे देकर फिल्में देख रहा है, हमें उसकी बातों को ही मानना चाहिए। मेरे हिसाब से ऑडियंस का जजमेंट कभी गलत नहीं हो सकता है। 

 दक्षिण भारतीय सिनेमा में हिंदी सिनेमा के सितारों को साथ लेने की जो शुरुआत हुई है, ये क्या हिंदी भाषी दर्शकों को आकर्षित करने की रणनीति का हिस्सा है या फिर ये कलाकार किरदार की जरूरतों के हिसाब से लिए गए हैं?

संजय दत्त को केजीएफ चैप्टर 1 के लिए भी अप्रोच किया गया था। हमारे निर्देशक प्रशांत नील चाहते थे कि अधीरा का किरदार संजय दत्त ही बड़े पर्दे पर जीवंत करें। तब तक पैन इंडिया जैसा कोई कॉन्सेप्ट नहीं था। तब तो हिंदी सिनेमा, कन्नड़ सिनेमा, तमिल सिनेमा, तेलुगू सिनेमा आदि शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था। तब भी हमने हिंदी सिनेमा के अभिनेताओं को अप्रोच किया था, लेकिन वो हमारे बजट में फिट नहीं हो पाते थे। लेकिन अभी हमारी इंडस्ट्री में परिवर्तन का दौर चल रहा है। अब भाषा की बंदिशें खत्म हो गई हैं। अब जिसको जिस भाषा का कंटेंट एंटरटेनिंग लगता है, वो उस भाषा की फिल्में और वेब सीरीज देखता है। अब ऑप्शन्स बढ़ गए हैं। 

 तमिल और तेलुगू जैसी सफलता आमतौर पर कन्नड़ फिल्मों को केजीएफ के पहले नहीं मिल पाई, इसकी वजह आपके हिसाब से क्या हो सकती है?

केजीएफ हमारी फिल्म नहीं है, केजीएफ कन्नड़ का प्राइड है। हां, केजीएफ से पहले कन्नड़ फिल्मों को तमिल और तेलुगू में इतनी सफलता नहीं मिली है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि कन्नड़ की फिल्मों का कंटेंट अच्छा नहीं होता है। हमारी इंडस्ट्री में भी बहुत अच्छे-अच्छे कलाकार, निर्देशक और निर्माता रहे हैं। लेकिन केजीएफ से पहले किसी भी कन्नड़ फिल्म ने इस भाषा की सीमा को तोड़ने की कोशिश नहीं की थी। तो तमिल और तेलुगू में केजीएफ को जो सफलता मिली है, वो प्रशांत नील की वजह से मिली है। भाषा की सीमा को तोड़ अन्य सिनेमा इंडस्ट्री में फिल्म को रिलीज करने का दृष्टिकोण उनका था। बतौर अभिनेता हमारा काम कन्नड़ के कल्चर का प्रतिनिधित्व करते हुए उनके दृष्टिकोण को पर्दे पर उतारना था। मैं हमेशा कहता हूं कि हमारी टीम 'लगान' की तरह थी, हमारे पास केजीएफ बनाने के लिए इक्विपमेंट्स नहीं थे, लेकिन वो जज्बा और जुनून जरूर था।

हिंदी सिनेमा के किन निर्देशकों के साथ आप हिंदी फिल्म करने की ख्वाहिश रखते हैं?
अब हमें ये 'वुड' को छोड़ देना चाहिए। बॉलीवुड, टॉलीवुड आदि सभी वुड को आग लगा देनी चाहिए। अब सिर्फ भारतीय सिनेमा की बात करनी चाहिए। ऐसा नहीं है कि मैं हिंदी सिनेमा (बॉलीवुड) की इज्जत नहीं करता हूं। मैं उनकी बहुत इज्जत करता हूं, वो लोग बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। लेकिन मुझे 'लार्जर दैन लाइफ' फिल्में ही पसंद हैं। ड्रामा-एक्शन वाली फिल्में पसंद हैं, जिसपर पब्लिक की सिटीयां बजें।

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